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पीईसीए को पत्रकारों के खिलाफ कार्रवाई का प्रमुख माध्यम बताया गया
Pakistan पाकिस्तान: विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस- 2026' से पहले पाकिस्तान प्रेस फाउंडेशन (पीपीएफ) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान में मीडिया को कानूनी दबाव, हिंसा, डिजिटल उत्पीड़न और वित्तीय दबाव का सामना करना पड़ रहा है। इस रिपोर्ट में जनवरी 2025 से अप्रैल 2026 के बीच पत्रकारों को निशाना बनाए जाने की कम से कम 233 घटनाओं को दर्ज किया गया है, जिनमें 67 हमले, 67 आपराधिक शिकायतें, 11 गिरफ्तारियां, 11 हिरासत और तीन अपहरण शामिल हैं। पाकिस्तानी डेली 'डॉन' के मुताबिक, "इस रिपोर्ट पर 'पाकिस्तान इलेक्ट्रॉनिक क्राइम्स एक्ट' (पीईसीए) का साया गहराया हुआ है। 2025 की शुरुआत में इसमें संशोधन किया गया था और पीपीएफ के शब्दों में बिना किसी स्टेकहोल्डर से सलाह-मशविरा किए इसे संसद में जबरदस्ती पास करवा दिया गया था।''
'डॉन' ने कहा, ''अब यह पत्रकारों के खिलाफ इस्तेमाल किया जाने वाला सबसे पसंदीदा हथियार बन गया है। दर्ज की गई 67 आपराधिक शिकायतों में से 34 में पीईसीए का इस्तेमाल किया गया था। रिपोर्ट के अनुसार, "नेशनल साइबर क्राइम इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एनसीसीआई) की तरफ से आने वाले नोटिस और समन अब 'एक आम बात' बन गए हैं। इसका पैटर्न बेहद निराशाजनक और पहले से ही पता होता है। कोई पत्रकार कुछ ऐसा प्रकाशित करता है, जो किसी को रास नहीं आता और उसके तुरंत बाद उसके खिलाफ शिकायत दर्ज हो जाती है।"
मानवाधिकार वकील ईमान जैनब मजारी-हाजिर और उनके पति हादी अली, जिन्होंने पीईसीए से जुड़े मामलों में पत्रकारों की पैरवी की थी, उन्हें इसी कानून के तहत 17 साल जेल की सजा सुनाई गई। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि कानूनी दबाव ने शारीरिक खतरे की जगह नहीं ली है, बल्कि यह उस खतरे के साथ-साथ एक और नई मुसीबत बनकर सामने आया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस्लामाबाद में 'महिला मार्च' को कवर कर रहे पत्रकारों को 8 मार्च को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया और लगभग आठ घंटे तक हिरासत में रखा। पीपीएफ ने मीडिया सुरक्षा से जुड़े मौजूदा कानूनों की अनदेखी पर चिंता जताई। यहां तक कि गिरफ्तारी के दौरान भी पत्रकारों से उनके इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जमा करने को कहा गया, जो उन कानूनों द्वारा दी गई निजता की सुरक्षा का उल्लंघन था।
रिपोर्ट में बताया गया है कि पाकिस्तान में महिला पत्रकारों को एआई-जनरेटेड कंटेंट के जरिए निशाना बनाया जा रहा है। पीपीएफ ने 2025-26 में ऐसे कई मामलों को दर्ज किया, जिनमें महिला पत्रकारों से जुड़ी मनगढ़ंत सामग्री ऑनलाइन फैलाई गई। पिछले साल नवंबर में पत्रकार बेनजीर शाह ने बताया कि उनका एक एआई-जनरेटेड वीडियो एक ऐसे अकाउंट से शेयर किया गया था, जिसे संघीय सूचना मंत्री भी फॉलो करते हैं। पीपीएफ ने जोर देकर कहा कि ऐसे हमले महिला पत्रकारों के काम को चुनौती देने के लिए नहीं, बल्कि बेहद निजी और लैंगिक तरीकों से उनकी प्रतिष्ठा को धूमिल करने के लिए किए जाते हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि 'डॉन' को दिए जाने वाले सरकारी विज्ञापनों को रोकना, पाकिस्तान के इस दैनिक समाचार पत्र पर आर्थिक दबाव डालने की एक कोशिश थी। उर्दू दैनिक 'सहाफत' को भी कथित तौर पर इसी तरह के बर्ताव का सामना करना पड़ा। पाकिस्तान इलेक्ट्रॉनिक मीडिया रेगुलेटरी अथॉरिटी (पीईएमआरए) ने भी उन मीडिया संस्थानों को 'कारण बताओ नोटिस' जारी किए, जिन्होंने मौजूदा 'रेड लाइंस' (सीमाओं) को चुनौती दी या उनका उल्लंघन किया।
'डॉन' की एक रिपोर्ट में कहा गया है, "यह रिपोर्ट इन विफलताओं को 'दंडमुक्ति' (बिना किसी सजा के बच निकलने) के एक व्यापक पैटर्न के संदर्भ में देखती है। रिपोर्ट के अनुसार, नवंबर 2025 में 'पत्रकारों और मीडिया पेशेवरों की सुरक्षा के लिए संघीय आयोग' की स्थापना एक स्वागत योग्य कदम था, लेकिन रिपोर्ट यह भी चेतावनी देती है कि अब इसे वास्तव में कार्यशील बनाया जाना चाहिए, जिसके लिए पर्याप्त संसाधन और वास्तविक स्वायत्तता का होना अनिवार्य है।"
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